गोविंदा एक ऐसा नाम जिसने 90 के दसक में अभिनय की दुनिया में तहलका मचाया हुआ था। लेकिन वर्ष 2000 के बाद उनके करियर पर ग्रहण सा लग गया। इसके पीछे कारण क्या था ये समझना बहुत जरुरी है। हालत ये हैं की हाल के दिनों में न्यूज़ में बने रहने के लिए उन्हें परिवार के अंदरूनी कलह को भी बाहर लाना पड़ा।
Govinda का जन्म 21 दिसंबर 1963 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम गोविंद अरुण आहूजा है। उनके पिता अरुण आहूजा 1940 के दशक के अभिनेता और निर्माता थे, जबकि मां निर्मला देवी शास्त्रीय गायिका थीं। बचपन से ही गोविंदा ने फिल्मी दुनिया की चमक देखी, लेकिन पिता का करियर ढलान पर था, जिससे परिवार को आर्थिक संघर्ष भी झेलना पड़ा। यही संघर्ष उनके स्वभाव में आत्मविश्वास, जिद और खुद को साबित करने की तीव्र इच्छा लेकर आया। माफ़ कीजिएगा वीडियो के बीच में आपसे अनुरोध करते हैं कि हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें और आपको गोविंदा की कौनसी फिल्म ज्यादा पसंद है कमेंट करके हमें बताएं।
गोविंदा ने 1986 में फिल्म इल्ज़ाम से अभिनय की शुरुआत की। शुरुआत से ही उनकी टाइमिंग, बॉडी लैंग्वेज और नृत्य शैली अलग नजर आई। 90 का दशक आते-आते वे हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाने लगे। आंखें, राजा बाबू, कुली नंबर 1, साजन चले ससुराल, हीरो नंबर 1, बड़े मियां छोटे मियां, हसीना मान जाएगी जैसी फिल्मों ने उन्हें “कॉमन मैन का सुपरस्टार” बना दिया। उनकी खासियत थी कि वे कॉमेडी, रोमांस और डांस को इस तरह मिलाते थे कि दर्शक उनसे तुरंत जुड़ जाता था। डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी उस दौर की सबसे सफल जोड़ियों में से एक मानी जाती है।
गोविंदा का उदय बेहद तेज था। वे लगातार हिट दे रहे थे, फीस ऊंची थी और फिल्मों की लाइन लगी रहती थी। लेकिन इसी दौर में उनके स्वभाव की कुछ कमजोरियां भी सामने आने लगीं। समय की पाबंदी न करना, फिल्मों को लेकर अत्यधिक चयनात्मक या कभी-कभी असमंजस में रहना और बदलते सिनेमा के साथ खुद को ढालने में देरी उनके करियर पर असर डालने लगी। 2000 के बाद मल्टीप्लेक्स कल्चर आया, कंटेंट बदला और गोविंदा की पारंपरिक मसाला-कॉमेडी शैली धीरे-धीरे हाशिये पर चली गई।
उनके पतन का एक कारण यह भी माना जाता है कि उन्होंने कई अच्छे प्रोजेक्ट्स ठुकरा दिए, जो बाद में दूसरे अभिनेताओं के लिए मील का पत्थर साबित हुए। साथ ही नए निर्देशकों और नई सोच से दूरी ने भी उन्हें पीछे कर दिया। कुछ फिल्मों में वापसी की कोशिश जरूर हुई, लेकिन वह जादू दोबारा नहीं चल पाया जो 90 के दशक में था।
विवादों की बात करें तो गोविंदा का नाम कई बार सुर्खियों में रहा। निजी जीवन में उनकी शादी को लेकर लंबे समय तक रहस्य बना रहा, क्योंकि करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने विवाह को सार्वजनिक नहीं किया था। अभिनेत्री रानी मुखर्जी के साथ उनके कथित रिश्ते की अफवाहों ने भी खूब तूल पकड़ा, हालांकि दोनों ने कभी इसे खुले तौर पर स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा सेट पर अनुशासन को लेकर उनके व्यवहार की आलोचना भी कई बार हुई।
राजनीति में कदम रखना भी उनके लिए विवाद और नुकसान दोनों लेकर आया। सांसद बनने के बाद फिल्मों से दूरी और राजनीति में सक्रियता न दिखा पाने से उनकी छवि को खास फायदा नहीं हुआ। एक दौर में एक निर्माता को थप्पड़ मारने का मामला भी सामने आया, जिसने उनकी प्रोफेशनल इमेज को चोट पहुंचाई। अभी हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमे गोविंदा एक स्कूल के प्रोग्राम में डांस करते नजर आये। जहाँ लोगों ने उन्हें ये कहते हुए टारगेट किया की ये दिन आ गए हैं गोविंदा के।
इसके बावजूद गोविंदा को आज भी उनके प्रशंसक प्यार और सम्मान से याद करते हैं। हिंदी सिनेमा में कॉमेडी को नई पहचान देने, डांस को सहज और आम आदमी के करीब लाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन 90 के दशक में जो लोकप्रियता उन्होंने हासिल की, वह उन्हें हिंदी फिल्म इतिहास में हमेशा एक खास जगह दिलाती है।
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